तुम कहते हो "तू कैसी है? कुछ भी करती रहती है..."
मैं कहती हूँ "जब तक तुमको हूँ पसंद, मैं जैसी भी हूँ, अच्छी हूँ"
जब ख़्वाब पिरोना सीखा मैंने,
तब शायद बहुत छोटी थी.
अब कैसे छूटे आदत ये,
आती-जाती साँसों सी?
तुम जानो दुनिया की दारी,
तुम समझो लोगों का खेल,
मेरी तो सारी दुनिया तुम हो,
जिससे है जन्मों का मेल.
जिन अधरों ने तुम को छुआ,
वो हर पल तुम्हारे हैं,
जिस धड़कन से दिल है सजता,
वो हर तरंग तुम्हारी है.
नाम न दे दीवानी का मुझको,
कह दो दुनिया वालों से,
पगली सी ख़ुशी जो आँखों से झाँखे,
तुम ही लाये हो सितारों से.
MCN: CJNS8-CS2A5-383Y8

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