अब भी एक कोना
बचा है शायद टूटने के लिए,
अब भी एक कोना बचा है,
मुझे नहीं पता वो कहाँ छुपा है…
पर अब भी एक कोना बचा है.
मैं संत नहीं, न कोई देव हूँ,
फिर भी मुस्कुराकर उसके
सवालों के जवाब देती हूँ,
उसके बिखरे ख़्वाब चुनकर,
उसकी पलकों पर सजा देती हूँ…
किसी दर्द का एहसास बचा नहीं,
इतने ज़ख्म मिले दिल को मेरे,
पर जाने कैसे ढूंढ लेते हैं हमदम
एक कोना सही सलामत सा…
सच्चा यार है मेरा, वो प्यार है मेरा,
जो बेदिल मुझे रहने नहीं देता,
जब भी सोचती हूँ अब तो कुछ बचा ही नहीं,
वो एक कोना दिल का फिर से है तोड़ देता.











.jpg)

