तुझ को पाने की दिल ने चाहत जो की,
बेगुनाह मैं बेचारा, गुनाह कर गया.
कभी तुझ को भी सदायें सुनाई दे,
सोच के दिल बेजुबान जाने क्या कह गया.
तुझ को पाने के दिन तो आते नहीं,
तुझ को खोने की रातें जवां कर गया.
किसी ज़रिया तुझ तक भी पहुंचे कभी,
वो किस्सा जो चंदा को बयां कर गया.
मेरी गुस्ताख़ बाँहों में तू होगी कभी,
जाने क्यूँ ख़्वाब निगाहों में बस गया.
रेत पर लिख कर तेरा नाम खूँ से,
उसे सीने से लगा मैं वहीँ मर गया.
MCN: C7QW3-CASKU-EB9E1

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