Saturday, March 12, 2011

फिर मिलेंगे...



ज़िन्दगी में कभी फिर मिलेंगे तो सही, 
उस दिन पूछेंगे सालों का हिसाब.
दुनिया इतनी बड़ी भी नहीं की तुम कहीं खो जाओ,
ज़िन्दगी इतनी छोटी भी नहीं की वो वक़्त ना आये जनाब.

ज़िन्दगी में कभी फिर मिलेंगे तो सही,
उस दिन खोलेंगे फिर वो पुरानी किताब.
पलटाकर देखेंगे उन पीले पन्नों को,
मिल जाये बिखरा हुआ हर सवाल का जवाब.

ज़िन्दगी में कभी फिर मिलेंगे तो सही,
उस दिन पियेंगे हम दोनों शराब.
होश में तो लब सिल जाते हैं,
शायद मदहोशी उठा दे सारे नकाब.

ज़िन्दगी में कभी फिर मिलेंगे तो सही,
उस दिन मौत पर भी होगा पूरा शबाब,
आज मेरी ज़मीं को खूँ से नहलाया है तूने,
तब सामने आ दिखाना तू अपना रुबाब.
ज़ख्म हम भी ताज़े रखेंगे तब तक,
और तू भी हरा रखना हर पुराना घाव.

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