हमारी मोहब्बत तो मुफ्त में बदनाम हुई,
हम तो आबिद बने ही खुश थे उन निघाओं के,
बात लबों तक आई और बेहयाई सर पे इलजाम हुई.
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बेवफ़ा तेरे इश्क ने हमें कुछ ऐसे किया पागल,
आइना भी अब देखें तो नज़र आये तेरी शकल,
रूख्सत भी न ली तूने न अलविदा ही कहा,
बस इसीलिए अब तक उम्मीद है तू ना देगा दगा.
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इस दिल पे तुम्हारा नाम लिखा,
अपने अश्कों से हमने एक पैगाम लिखा,
तू ना समझ पाया उस स्याही के दर्द को,
तुझे तो हर लफ़्ज में इश्क-ए-नाकाम दिखा.
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छुपते नहीं है देखकर उनको,
जिनसे छुपा नहीं है राज़ कोई,
इतने नाज़ुक भी ना थे धागे रिश्तों के,
की हमें पता न हो कब-कब तेरी आँख रोई,
फ़क्त नाम बदले हैं रिश्तों के, जज़्बात नहीं,
अब तक लिए खड़े हैं तेरे आँसुओं के लिए अपना अंचल वहीं.
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