आँखें दिल का आइना होती हैं, आँखें जज़्बातों की जुबां होती हैं,
जो कहती हैं आपकी आँखें, वो बात होठों से नहीं बयां होती है,
किसी और की नज़र से कभी उनको देखिएगा,
जो उन में है, वो बात सौ जामों में कहाँ होती है.
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किसी की हंसी को उसकी ख़ुशी ना समझो,
किसी की चुप्पी को उसकी बेबसी ना समझो,
हम नहीं भूलते हैं अपनी हदें,
बस हमारी बातों को तुम दिल्लगी ना समझो.
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हमने दिखाया खून-ए-जिगर तो ज़माने को रंग-ए-हिना लगा,
हम फ़ना हुए उनका नाम लेकर, और ज़माने को अंदाज़ शयराना लगा.
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सितम करने वाले भी कितने बेरहम होते हैं,
नींदें हमारी लेकर खुद चैन से सोते हैं,
किसी की याद में आज हमारी जान जाएगी,
ये दुआ है हमारी आज रात उन्हें भी नींद नहीं आएगी.
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