Sunday, October 9, 2011

तीन पहर





हल्की-फुल्की बदलियों में, आँख मिचोली खेलता चंदा,
पत्तियों पर - टहनियों पर, चांदनी का बिखरा आँचल,
पिघले चाँदी की लहरों से लबालब भरा सागर,
चाँदी की इस सर्द रेत पर ठण्ड सेकती मेरी अँगुलियाँ,
कोई एक सीपी इधर, कोई एक शंख उधर, और मेरी अँगुलियाँ,

बस मैं 
और नमकीन हवाओं में 
काली चट्टानों पर 
लहराते चाँदी के परदे...


पहली किरण की लालिमा से, रंग चुराता बेरंग गगन,
अपने रंगों की होली में, मुझे भीगती रवि-किरण,
पिघला सोना अताह सागर का झलक रहा उसके नयनों में,
खेल-मग्न, अधनंगा बच्चा, दुनियादारी की नहीं ख़बर,
भीगे गेसू से ओस चुराती मेरी अँगुलियाँ,

बस मैं 
और समंदर में
डुबकी लगाता 
एक पंछी...


शाम के रुमानीपन के, वर्क चढ़े नारियल का पानी,
दो दिल एक जान से, बतियाते कई कृष्णा और राधा रानी,
लम्बाती परछाईयाँ, झिलमिल झिलमिल थोड़ा अँधेरा,
झाड़ियों में एक झींगुर भी, छेड़ रहा कोई तान अनजानी,
एक नन्ही सी, स्वच्छ जल-धारा में खेलती मेरी अँगुलियाँ...

बस मैं 
और साँझ की डूबती रौशनी में
राह खोजती 
एक कश्ती...

MCN: CHCQF-GFY1A-247NL

Thursday, September 8, 2011

Life से कोई race लगी है




Life से कोई race लगी है,
हर घड़ी जैसे भाग रही है,
एक पल New Year की गूँज,
अगले पल दिवाली की फुलझड़ी है,
Life से कोई race लगी है...

लम्हों में लम्हे समेटे,
मेरी पलकें भीग रही हैं,
कुछ लम्हों को रोक लेने की,
मुझ पर जैसे ज़िद्द चढ़ी है...
Life से कोई race लगी है...


गरम पानी के बुलबुलों सा,
Excited हर incident है,
Incidents में दोस्त मिले थे,
आज शाम खाली पड़ी है...
Life से कोई race लगी है...

एक वक़्त पर कमरा मेरा,
मीठी जलेबी से भरा हुआ था,
Dieting ने अब मिठास छीन ली,
And मंजिल maze में गुम गयी है,
Life से कोई race लगी है...

दिल की हो या हो दिमाग की,
कोई लहर इतनी गहरी नहीं थी,
कई बार तैर के पार करी जो,
लहर वही सुनामी बनी है,
Life से कोई race लगी है...

कलआज और कल मिलाकर,
छोटी सी ये किताब बनी है,
कैसे फाडूं काले पन्ने,
वो भी मेरी ज़िन्दगी है,
Life से कोई race लगी है...

Planning की अब लत पड़ी गयी,
Spontaneity से allergy है,
Future का blueprint भी ready,
जब की अगले पल की ख़बर नहीं है,
Life से कोई race लगी है...


जीतने को आदत बनाया,
Egos की जंग छिड़ी है,
Rules बहुत से list कर दिए,
खेल खेलना आता नहीं है,
Life से कोई race लगी है...

आगे बढ़ने की मारा-मारी,
सबको खुश करने की लाचारी,
कल जिसने थी मेरी मारी,
आज उसकी ही लग रही है,
Life से कोई race लगी है...

Extinction की कगार पर पहुंची,
बड़ी मुश्किल से एक मिली है.
ऊपर से तो सब हँसते हैं,
दिल से निकले वो हँसी नहीं है.
Life से कोई race लगी है...

सूरतशब्दों के पीछे भागे,
नीयत सबकी ही एक सी है,
Hard-to-get का game है भाई,
मिल जाओ तो कदर नहीं है!
Life से कोई race लगी है...

Peace-peace चिल्लाकर देखो,
Inner peace की खोज चली है,
थम जाने को जी करता है,
पर खुद के लिए ही time नहीं है...
Coz life से ही race लगी है...

MCN: CDSJ8-121KJ-H761B


Wednesday, June 1, 2011

शायरी



जो मेरा हो जायेगा तो तेरा क्या जायेगा?
बहुतों ने तुझे चाहा, बहुतों को तूने चाहा,
जो किसी को अपना बनाएगा तो तेरा क्या जायेगा?
जिंदा तो ये बदन अब भी है लेकिन,
जो तू इसकी ज़िन्दगी बन जायेगा तो तेरा क्या जायेगा?
तन्हाई की रेत में सिक रहे हैं सदियों से,
जो तू मोहब्बत में थोड़ा जलायेगा तो तेरा क्या जायेगा?
नाम मुझे दिया है दीवानी का दुनिया ने,
जो तू कुछ और दीवानी बनायेगा तो तेरा क्या जायेगा?

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मेरी बेहयाई पे ना ख़फ़ा हो महताब मेरे,
तेरे साए के नूर से ही तो चलती है ज़िन्दगी मेरी,
तेरी हर नज़र की कीमत अपनी साँसों से चुकाती हूँ मैं,
मेरी हर धड़कन  बयां करती है मजबूरी मेरी,
तुझे कौन देखता है इसकी फ़िक्र क्यूँ हो मुझे,
जब तक बस मुझे देखती है हर नज़र तेरी...


Sunday, May 15, 2011

भजन



मैं वो गीत हूँ जो तेरी मुरली से कहे,
कभी मुझ को भी तू राग बना.
मैं वो थाप हूँ जो तेरे डमरू से कहे,
कभी मेरी भी धुन पे नाच ज़रा.
मैं वो मोती हूँ जो तेरी माला से कहे,
मुझको भी पिरो, मुझको भी सजा.

मैं काम, द्वेष, मद की दासी,
मेरे बंधन खोलो मनवासी,
मैं वो दीप हूँ जिसमे ज्योत नहीं,
मेरे नैनों को तू दरस दिखा.

जग मिथ्या है मैं बोल रही,
पर माया के पट खोल रही,
मैं वो प्राण हूँ जो बस डोल रहे,
मेरी नैय्या को तू पार लगा.

मेरे राम बनो, मेरे कृष्ण बनो,
मेरे शिव भी बनो, शक्ति भी बनो,
मेरी भक्ति बनो, मेरी बुद्धि बनो,
मेरी मुक्ति बनो परमेश्वरा....

MCN: CLX7T-SQ8BY-WT4GE

Friday, May 13, 2011

ये कैसी मैं!!




तुम कहते हो "तू कैसी है? कुछ भी करती रहती है..."
मैं कहती हूँ "जब तक तुमको हूँ पसंद, मैं जैसी भी हूँ, अच्छी हूँ"

जब ख़्वाब पिरोना सीखा मैंने,
तब शायद बहुत छोटी थी.
अब कैसे छूटे आदत ये,
आती-जाती साँसों सी?

तुम जानो दुनिया की दारी,
तुम समझो लोगों का खेल,
मेरी तो सारी दुनिया तुम हो,
जिससे है जन्मों का मेल.

जिन अधरों ने तुम को छुआ,
वो हर पल तुम्हारे हैं,
जिस धड़कन से दिल है सजता,
वो हर तरंग तुम्हारी है.

नाम न दे दीवानी का मुझको,
कह दो दुनिया वालों से,
पगली सी ख़ुशी जो आँखों से झाँखे,
तुम ही लाये हो सितारों से.

MCN: CJNS8-CS2A5-383Y8


Saturday, March 12, 2011

एक कोना दिल का



अब भी एक कोना 
बचा है शायद टूटने के लिए,
अब भी एक कोना बचा है, 

मुझे नहीं पता वो कहाँ छुपा है…
पर अब भी एक कोना बचा है.

मैं संत नहीं, न कोई देव हूँ,
फिर भी मुस्कुराकर उसके
सवालों के जवाब देती हूँ,
उसके बिखरे ख़्वाब चुनकर,
उसकी पलकों पर सजा देती हूँ…

किसी दर्द का एहसास बचा नहीं,
इतने ज़ख्म मिले दिल को मेरे,
पर जाने कैसे ढूंढ लेते हैं हमदम
एक कोना सही सलामत सा…

सच्चा यार है मेरा, वो प्यार है मेरा,
जो बेदिल मुझे रहने नहीं देता,
जब भी सोचती हूँ अब तो कुछ बचा ही नहीं,
वो एक कोना दिल का फिर से है तोड़ देता.

MCN: CF1TF-6HUUY-U3C69

सज़दा


सज़दा... तेरे लिए 

क्यूँ पत्थर बन के बैठा है,
तेरे दिल में कुछ अरमान नहीं,
मैं कितनी और सदाएं दूं,
सुन के भी तू चुप है कहीं.
मैं जब-जब राग सजाती हूँ,
तू तब-तब हाथ बढ़ाता है,
जाने क्या सोच के लेकिन तू,
वापस पीछे हट जाता है.

ना दूर हो मुझसे मेरे पिया… (2)

मैं तन हारी, मैं मन हारी,
मीरा बन बोलूं गिरधारी,
मजनू बन बोलूं, सब हारी,
तेरी खोज में ओ मेरे पीयू,
मैं कितने दरिया डूब गयी,
की मोती सा छुपा इस सागर में तू मिल जाये कहीं,
साँसों की तुझसे डोर जुडी,
और मैं पतंग सी आस्मां में उडी.

ना दूर हो मुझसे मेरे पिया… (2) 

तू रूठा जो तो माने न,
मैं जग छोडूं, जो तू कहदे हाँ,
तेरा एक पल का प्यार जो मिल जाये,
मैं जन्मों का जीवन कर दूं दान,
बस बोल दे मुझसे मेरे पीयू,
जो तुझ तक मुझको ले आये,
वो आग का दरिया पार करूँ.

ना दूर हो मुझसे मेरे पिया… (2)

मैं  कौनसी वो कसौटी दूं,
जो तू हँस के मुझको अपनाले,
अब कौनसा देव मनाऊं मैं,
जो तेरे दिल को बहलाले,
तेरी एक हंसी छूने के लिए,
मैं मीलों पैदल चल जाऊं,
तू ही दिखा दे मुझे मेरे पीयू,
वो राह जिससे तुझ को पाऊं.

 MCN: CN42B-JPSKK-1YWGK