Saturday, March 12, 2011

तुझे देखा है!



भुजते दिए की कालिमा में, कई बार तुझे देखा है,
उगते सूरज की लालिमा में, कई बार तुझे देखा है.

अपने बहते आंसुओं के, पार तुझे देखा है,
मुझे छूने की कोशिश में, एक बार तुझे देखा है.

चंदा को जब भी देखूं, लगे हर बार तुझे देखा है,
हर झपकन के साथ लगे, बार-बार तुझे देखा है.

हर पल यही सोचूं मैं, कहाँ यार तुझे देखा है,
बिन देखे ही करूँ इंतज़ार, ऐसा प्यार कहीं देखा है.

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