Saturday, March 12, 2011

ग़ज़ल



रात दिन - दिन रात,
मेरा चेहरा, उनके हाथ.
संभले रहना ऐ मेरे दिल अभी,
छुअन पागल ना कर दे तुझ को कहीं.

ये खुला आसमां, खूबसूरत जहाँ.
बिखरे तारे कहीं, चाँद की रोशनी.

बंद आँखें, होंठ खुले, जज़्बातों की छावं तले,
मिले आज हम-तुम, फिर आज मिले,
रहने दो अभी ये कुछ फासले.

खुश्बूँओं की गली, वो हर खिलती कली, 
भरलो साँसों में तुम एक नयी ज़िन्दगी.

मिटीं दूरियां, वो आगे बढ़े,
मोतियों की लड़ी, टूट के बिखरी,
मर गए हम शरम से खड़े ही खड़े. 

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