जितनी कम रातें, उतनी सारी बातें,
जैसे घटती रातें, वैसे बढ़ती बातें,
हर बात एक रात चुरा लेगी,
हर रात तेरा साथ घटा देगी.
हर रात एक कशिश, हर बात एक नशा,
उफ्फ़!! गुनाहे मुहब्बत की इतनी बड़ी सज़ा;
हर गुज़रती रात इस एहसास को बढ़ाती है,
क्यूँ मुहब्बत किसी को इस तरह तड़पाती है.
इस दिल का दर्द तो हर रात का रोना है,
क्या इन अंधेरों का कोई सवेरा होना है?
इस सवाल का जवाब मुझे जल्दी ही मिल गया.
एक खुबसूरत दिन मेरी ज़िन्दगी में भी खिल गया,
अपने इस रिश्ते को एक मोड़ मिल गया...
पर जाने क्यूँ याद आ रही मुझे अपनी पहली मुलाक़ात है,
जाने क्यूँ प्यारी इस उजाले दिन से हर वो झगड़ती काली रात है,
उजालों ने रोशन की होगी ज़िन्दगी औरों की,
इस सुबह के साथ आती तेरी रुख्सत की गाड़ी,
लाई मेरे लिए मौत की सौगात है.

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