Saturday, March 12, 2011

ग़ज़ल


आज की रात मुझे ख्वाबों में खो जाने दो,
ऐसी हवाओं में तुम्हारी बाहों में सो जाने दो.

चाँद की रोशनी में बटोरलो सारे हीरे,
ना करो सुबह का इंतज़ार, जो होता है हो जाने दो.

ज़िन्दगी के सफ़र में शायद इतना ही साथ लिखा था,
जाते हैं अब बाकी ज़िन्दगी किसी और के संग बिताने दो.

दिल के इस बाग़ में जो लगाये हैं मुहब्बत के फूल,
तोड़ के एक मुझे अपने बालों में लगाने दो.

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